गदा स्पोर्टस या गदा चक्र गेम क्या है.......



रामायण में हनुमान जी की गदा और महाभारत में भीम और दुर्योधन के गदायुद्ध का नजारा आप लोगों ने सिर्फ टीवी पर ही देखा होगा परन्तु अब इस युद्ध कला को आप अपनी आँखों से देख सकते हैं। भारत की प्राचीनतम युद्ध कलाऔं में शामिल तीरंदाजी व तलवारबाजी के बाद अब गदायुद्ध भी खेल के मैदान में उतर चुका है।
भारत की इस प्राचीनतम युद्ध कला को लेकर "गदा स्पोर्ट्स फैडरेशन (इंडिया)"  का गठन भी हो चुका है। "गदा स्पोर्ट्स फैडरेशन (इंडिया)" सन् 2011 में आस्तित्व मे आई और गदायुद्ध की इस कला को गदा खेल के रूप मे प्रचारित करने व लोकप्रिय बनाने के लिए सराहनीय कदम उठा रही है।

गदायुद्ध का जन्म दाता सम्भवतः हमारा पूर्वज आदि मानव ही है। आदिकाल मे आदिमानव ने अपनी सुरक्षा तथा जानवरों के शिकार करने के लिए अनेक प्रकार के हथियारों का निर्माण किया। उन्हीं हथियारों में उसने एक डंडे पर एक पत्थर बांध कर एक मजबूत हथियार को बनाया जिसके एक ही प्रहार से वह अपने शत्रुओं और खतरनाक जंगली जानवरों को धाराशायी कर सकता था। वास्तव में यही प्रथम गदा थी जिसे मानव शिकार और लड़ाई के दौरान प्रयोग करता था।

धीरे-धीरे यह और अधिक उन्नत और लोकप्रिय होता गया। धातुओं के अविष्कार के बाद मानव ने धातु के बेहद मजबूत गदा बनाने प्रारम्भ कर दिए। रामायण की कथा के अनुसार महाबली बाली सर्वश्रेष्ठ गदाधारी थे। कथानुसार जब वह अपनी गदा लेकर युद्ध के लिए आता था तो उसे देखकर ही शत्रु इतना भयभीत हो जाया करता था कि उसकी आधी शक्ति क्षीण हो जाती थी। रामायण से ही पता चलता है कि महाबली हनुमान सबसे चतुर गदाधारी रहे हैं जिनके गदा प्रहारों एवं पैंतरौं का शत्रु के पास कोई जवाब नहीं होता था। इनके अलावा अंगद, सुग्रीव, नल और नील भी महाबली गदाधारियौं की श्रेणी मे आते हैं।

महाभारत के काल में भी गदायुद्ध का प्रचलन जोरों पर रहा है। महाभारत की लड़ाई के अंतिम चरण में महाबली भीम और दुर्योधन के बीच लड़ी गई गदायुद्ध की लड़ाई बड़ी भीषण और प्रसिद्ध रही है। यद्यपि भीम ने नियम तोड़कर दुर्योधन की जंघा पर प्रहार करके उसे पराजित किया था। अतः यह तो स्पष्ट है कि गदायुद्ध विशुद्ध रूप से भारतीय युद्ध कला है।

गदा खेल:- गदा खेल या गदा स्पोर्ट्स गदायुद्ध का ही बदला हुआ आधुनिक स्वरूप है। गदा खेल जन्मदाता प्रसिद्ध मार्शल आर्ट्स मास्टर चित्रेन्दर कुमार हैं। उनके अनुसार यदि तीरंदाजी, तलवारबाजी आदि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों के रूप में मान्यता प्राप्त है तो गदा भी इसमें शामिल होना चाहिये। आखिर यह.हमारे देश की परम्परागत युद्धकला रही है।

इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर मास्टर चित्रेन्दर कुमार ने अपने मित्र प्रशिक्षकों मास्टर प्रमोद कटारिया, सुन्दरलाल चौहान व इन्द्रसेन टांक के सहयोग से सन् 2011 मे "गदा स्पोर्ट्स फैडरेशन (इंडिया)" की स्थापना की। मास्टर चित्रेन्दर कुमार फैडरेशन के तकनीकी निर्देशक व महासचिव, मा.प्रमोद कटारिया और मा. सुन्दरलाल सहसचिव और मा. इंद्रसेन टांक अध्यक्ष चुने गए। मास्टर चित्रेन्दर कुमार ने बड़े परिश्रम से गदा खेल की नियमावली भी तैयार कर दी। इस खेल को लोकप्रिय बनाने के लिए इसकी प्रतियोगिताएं भी आयोजित होना जरूरी था और प्रतियोगिता के लिए विशेष गदा का होना भी जरूरी था। मास्टर चित्रेन्दर कुमार ने इस चुनौती को भी स्वीकार किया और बहुत मेहनत के बाद स्पोर्ट्स गदा भी बना लीं। इस प्रकार विश्व की पहली गदा स्पोर्ट्स प्रतियोगिता के लिए सभी प्रमुख औपचारिकताएं पूरी कर ली गई। 

प्रथम गदा स्पोर्ट्स प्रतियोगिता का आयोजन 29-30 दिसम्बर 2011 को मा.इंद्रसेन टांक के गृहनगर श्रीगंगानगर, राजस्थान में किया गया। इस प्रतियोगिता में राजस्थान के अलावा चण्डीगढ़, पंजाब, हरियाणा तथा गुजरात के खिलाड़ियों ने कड़ाके की ठंड के बावजूद बढ़-चढ़ कर भाग लिया।    इस प्रतियोगिता में पंजाब की टीम ने पहला, हरियाणा ने दूसरा व चण्डीगढ़ की टीम ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। 

दूसरी राष्ट्रीय स्तर की गदा खेल प्रतियोगिता 2012-13 का आयोजन मोहाली, पंजाब में किया गया। इस प्रतियोगिता में पहली बार महाराष्ट्र एवं बिहार के खिलाड़ियों ने भी भाग लिया।

इस प्रकार गदा स्पोर्ट्स फैडरेशन (इंडिया) की अथक प्रयासों के परिणाम स्वरूप गदा खेल की लोकप्रियता बढ़ती गई और इसकी तीसरी राष्ट्रीय प्रतियोगिता 2013-14 महेन्द्रगढ़, हरियाणा में।
चौथी राष्ट्रीय गदा खेल प्रतियोगिता 2014-15 सीकर, राजस्थान में।
पाचवीं राष्ट्रीय गदा खेल प्रतियोगिता 2015-16 दिल्ली में ।
छठी राष्ट्रीय गदा खेल प्रतियोगिता 2016-17 जीरकपुर, मोहाली, पंजाब में आयोजित की गई।

गदा स्पोर्ट्स की एक विशेषता यह भी है कि इसमे गदा प्रहार के अलावा किक का प्रहार भी किया जाता है। अब इसे और अधिक आकर्षक बनाने के लिए इसमे नाक आउट नियम भी लागू कर दिया गया है।

गदा स्पोर्ट्स में दो प्रकार के मुकाबले होते हैं।
1) गदायुद्ध
2) गदाचक्र

मुकाबले के लिए गदा हाथ में लेते ही खिलाड़ी अपार जोश.से भर जाता है और देखने वालों को गदायुद्ध का मुकाबला रोमांचित कर देता है। गदाचक्र में खिलाड़ी अकेले ही गदायुद्ध के पैंतरौं का प्रदर्शन करता है। 

यह खेल भले ही नया हो लेकिन इसकी जड़ें बहुत ही गहरी और मजबूत हैं ।निकट ही भविष्य में वह दिन भी आएगा जब गदा स्पोर्ट्स हमारे भारतवर्ष में ही नहीं बल्कि विश्व भर के गली मोहल्लों में खेला जाने लगेगा और उम्मीद है जल्दी ही यह ओलंपिक खेलों में भी शामिल होगा और भारत की शान बढ़ाएगा।






 जिला मुजफ्फ़रनगर की संस्था एकलव्य युवा टैलेंट हब इस प्राचीन  कला गदा युद्ध का प्रचार प्रसार व प्रशिक्षण करा रही है।








 

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